राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल (हेल्पलाइन 1930)

🛡️ प्रमाणित शासकीय सूचना ऑडिट (VERIFIED CIVIC INFORMATION) तथ्य जांच: 04/09/2026
नोडल विभाग / प्राधिकरण: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय, भारत सरकार (Ministry of Home Affairs)
अधिकृत सरकारी पोर्टल: https://cybercrime.gov.in/ (GOV Direct) ↗
स्रोत सत्यापन व अद्यतन: 04/09/2026 (Live Audit) | अंतिम वेब अद्यतन: September 2026
आगामी निर्धारित समीक्षा: 31/12/2026 (त्रैमासिक नीतिगत समीक्षा)
समीक्षा इकाई (Desk): शासकीय योजना अनुसंधान प्रकोष्ठ (Sarkari JanSewa Policy & Verification Desk)
वैधानिक संदर्भ: विभागीय शासनादेश (GO), आधिकारिक राजपत्र अधिसूचनाएं व अधिकृत पोर्टल डेटाबेस
जनहित डिस्क्लेमर: Sarkari JanSewa नागरिकों की सुविधा हेतु एक स्वतंत्र गैर-सरकारी सूचना गाइड है। हम किसी विभाग/मंत्रालय के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं। समस्त आवेदन व सत्यापन केवल ऊपर दिए गए आधिकारिक पोर्टल पर ही करें।

योजना का संक्षिप्त विवरण (Overview)

गृह मंत्रालय (MHA) के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा संचालित "राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल" (cybercrime.gov.in) और 24x7 राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 देश में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (UPI फ्रॉड, क्रेडिट/डेबिट कार्ड क्लोनिंग, ओटीपी ठगी, फर्जी लोन ऐप, डिजिटल अरेस्ट) और साइबर अपराधों के निवारण हेतु आधिकारिक मंच है। घटना के तुरंत बाद (Golden Hour में) 1930 या पोर्टल पर रिपोर्ट करने से नोडल एजेंसियों व संबंधित बैंकों को संदिग्ध लेन-देन की चेन को ट्रैक कर आगे के खातों में ट्रांसफर रोकने का त्वरित अवसर मिलता है।

मुख्य लाभ एवं विशेषताएं (Key Benefits)

  • हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करने से बैंकों व पेमेंट गेटवे को संदेहास्पद खातों को इंटरसेप्ट करने का अलर्ट प्रेषित किया जाता है।
  • बिना थाने के चक्कर काटे घर बैठे ऑनलाइन ई-शिकायत (Formal Cyber Complaint) दर्ज करने और पावती रसीद (Acknowledgment Number) की प्राप्ति।
  • महिलाओं व बालिकाओं के विरुद्ध अश्लील सामग्री व साइबर उत्पीड़न की शिकायतों को 100% गोपनीय (Anonymous Reporting) रखने की सुविधा।

पात्रता के नियम व शर्तें (Eligibility Criteria)

  • भारत का कोई भी नागरिक जो किसी भी प्रकार के ऑनलाइन वित्तीय फ्रॉड अथवा साइबर अपराध का शिकार हुआ है।

आवश्यक दस्तावेजों की सूची (Documents Required)

  • बैंक ट्रांजैक्शन आईडी (UTR No. / Transaction Ref No.)
  • बैंक खाता संख्या, डेबिट कार्ड के अंतिम 4 अंक व धोखाधड़ी का समय/तारीख
  • धोखेबाज का मोबाइल नंबर, UPI ID, वेबसाइट लिंक या ईमेल
  • व्हाट्सएप चैट / एसएमएस / फर्जी ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट (Screenshots)

⚠️ आवेदन रिजेक्ट होने व किस्त रुकने के शीर्ष 5 कारण (DBT & Welfare Schemes)

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व सरकारी पेंशन/कल्याणकारी योजनाओं में 35% से अधिक फॉर्म इन 5 गलतियों से रुकते हैं:

  • 1. बैंक खाता NPCI / आधार DBT से लिंक न होना (किस्त वापस लौटना): बैंक खाते में आधार लिंक होना अलग बात है और NPCI सर्वर मैपर पर DBT इनेबल होना अलग बात है। यदि DBT इनेबल नहीं है, तो सरकारी किस्त क्रेडिट नहीं हो पाती।
    समाधान: अपनी बैंक शाखा में जाकर "NPCI Aadhaar Seeding Form" जमा करें अथवा पोस्ट ऑफिस (IPPB) में DBT खाता खुलवाएं।
  • 2. आधार e-KYC या जीवन प्रमाण (Life Certificate) पेंडिंग रहना: पीएम किसान, पेंशन और राशन कार्ड में बायोमेट्रिक या आधार ओटीपी e-KYC अनिवार्य है। e-KYC न होने पर लाभार्थी सूची से नाम अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिया जाता है।
    समाधान: आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आधार नंबर व मोबाइल OTP अथवा सीएससी केंद्र पर फिंगरप्रिंट लगाकर तत्काल e-KYC पूरा करें।
  • 3. लैंड सीडिंग (Land Seeding) अथवा भूलेख अभिलेख असत्यापित होना: कृषि व आवास योजनाओं में यदि लाभार्थी के नाम पर दर्ज जमीन का खतौनी रिकॉर्ड राजस्व परिषद से डिजिटल रूप से सत्यापित नहीं होता, तो स्टेटस में Land Seeding NO आ जाता है।
    समाधान: अपनी वर्तमान खतौनी नकल और आधार कार्ड लेकर तहसील के लेखपाल अथवा कृषि विभाग कार्यालय में भूलेख अंकन कराएं।
  • 4. परिवार में पहले से कोई लाभार्थी होना या अपात्रता (Exclusion Criteria): एक परिवार (पति-पत्नी व नाबालिग बच्चे) में केवल एक ही पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ मिल सकता है। परिवार में आयकर दाता या सरकारी कर्मचारी होने पर फॉर्म स्वतः अमान्य हो जाता है।
    समाधान: योजना के वैधानिक पात्रता नियमों की जांच करें; केवल वही व्यक्ति आवेदन करे जिसके परिवार में कोई अन्य व्यक्ति लाभ न ले रहा हो।
  • 5. आधार, बैंक पासबुक और आवेदन फॉर्म में नाम/पिता के नाम की स्पेलिंग विसंगति: नाम में एक भी अक्षर की भिन्नता होने पर PFMS और UIDAI का ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन सिस्टम मिसमैच एरर दर्ज कर भुगतान रोक देता है।
    समाधान: अपने आधार कार्ड के अनुसार बैंक खाते और जनसेवा फॉर्म में नाम व जन्मतिथि को 100% एकसमान कराएं।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें (Step-by-Step Application Process)

  1. चरण 1 (अत्यंत महत्वपूर्ण): वित्तीय ठगी होते ही बिना देरी किए 1930 डायल करें और ऑपरेटर को फ्रॉड का समय, राशि, बैंक का नाम और ट्रांजैक्शन यूटीआर (UTR) बताएं।
  2. चरण 2: हेल्पलाइन सिस्टम द्वारा संबंधित बैंकों को अलर्ट भेजा जाता है ताकि संदिग्ध खातों में लेन-देन रोकने का प्रयास किया जा सके।
  3. चरण 3: आपके मोबाइल पर एक SMS और 14 अंकों का Acknowledgement Number प्राप्त होगा।
  4. चरण 4: 24 घंटे के भीतर cybercrime.gov.in पर जाएं और "Report Financial Fraud" पर क्लिक करें।
  5. चरण 5: अपने मोबाइल और प्राप्त Acknowledgement Number से लॉगिन करके घटना का पूरा विवरण और स्क्रीनशॉट अपलोड करें।
  6. चरण 6: शिकायत संबंधित साइबर क्राइम पुलिस यूनिट को प्रेषित की जाती है और बैंक व कानूनी सत्यापन के अनुसार आगे की कार्यवाही होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

साइबर फ्रॉड में "गोल्डन ऑवर (Golden Hour)" का क्या महत्व है?

धोखाधड़ी होने के प्रथम 1 से 2 घंटे को गोल्डन ऑवर कहते हैं। इस दौरान 1930 पर कॉल करने से पैसा अपराधी के खाते से एटीएम द्वारा निकलने से पहले ही बैंक में फ्रीज हो जाता है और 100% वापसी की संभावना रहती है।

🎥 आधिकारिक वीडियो गाइड व ऑनलाइन फॉर्म ट्यूटोरियल

राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (हेल्पलाइन 1930) पर ऑनलाइन शिकायत YouTube पर देखें ↗